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गाइड · प्रक्रिया

बयाना: छोटा पैसा, बड़े नियम

पढ़कर सुनाएँ

इक़रारनामे में क्या-क्या दर्ज हो? (सूची)

  1. पक्ष — नाम वैसे ही जैसे रिकॉर्ड में हैं
  2. खसरा नंबर और हिस्सा — पूरा और साफ़
  3. कुल दाम, बयाना रक़म, बाक़ी की समय-सारणी
  4. दोनों तरफ़ की चूक पर बयाने का हश्र — संख्या में
  5. रजिस्ट्री की आख़िरी तारीख़; ख़र्च कौन-क्या देगा
  6. क़ब्ज़ा कब मिलेगा — और पहले मिले तो इक़रारनामे की रजिस्ट्री

चूक पर बयाना ज़ब्त — कहाँ तक चलता है?

अनुबंध-क़ानून (धारा 73–74) मुआवज़े को असल नुक़सान और “वाजिब पूर्व-आकलन” की कसौटी पर तौलता है — सज़ा जैसी ज़ब्ती अदालतें काट देती हैं। इसलिए हश्र लिखते समय अदब से लिखिए: रक़में ऐसी जो नुक़सान की सच्ची झलक हों। और स्टाम्प का बहाना कभी मत सुनिए — इक़रारनामे का स्टाम्प ₹100 (Art 5(c)) है; बिना काग़ज़ का बयाना क़ानून में दान जैसा है।

₹100

इक़रारनामे का स्टाम्प — ख़र्च कोई बहाना नहीं।

देने से पहले की आख़िरी जाँच

बयाना जाँच के बाद की चीज़ है, पहले की नहीं: नकल-इंतकाल-गिरदावरी पढ़े बग़ैर दिया बयाना झगड़े की फ़ीस है। कमरे में सही लोग हों — हर दर्ज हिस्सेदार या उसका वैध मुख़्तार — और जो तय हो, उसी शाम लिखकर (WhatsApp पर ही सही) दोनों तरफ़ से बिना-एतराज़ हो जाए: सस्ता सबूत इसी बाज़ार की सबसे क़ीमती चीज़ है।

स्रोत

  1. अंग्रेज़ी गाइड (मूल) — धाराओं सहित — /guides/token-bayana-agreement-explained/ · 17 Jul 2026

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