गाइड · बचाव
लाल झंडे: जहाँ दिखें, वहाँ रुक जाइए
सबसे बड़े लाल झंडे कौन-से हैं? (सूची)
- GPA/वसीयत-बंडल पर “सस्ती” ज़मीन — रजिस्टर्ड डीड नहीं तो हक़ नहीं
- विक्रेता गिरदावरी में कभी नहीं दिखता
- “परिवार सहमत है” — पर दर्ज हिस्सेदारों के दस्तख़त नहीं
- खसरा नोटिफ़ाइड सीमा को छूता है और पिच में उसका ज़िक्र नहीं
- रिकॉर्ड की क़िस्म बरानी, दाम नहरी वाले
- नक़द-जल्दी-आज ही — काग़ज़ बाद में
GPA का सच क्या है?
सूरज लैम्प बनाम हरियाणा (2011) साफ़ कह चुका है: GPA-इक़रार-वसीयत का बंडल बिक्री नहीं है और उससे हक़ नहीं जाता। पंद्रह साल बाद भी वही बंडल छूट के साथ बिकता है — छूट इसलिए क्योंकि टाइटल है ही नहीं। वैध रूप ज़रूर है — ग़ैर-हाज़िर मालिक का धारा-33 प्रमाणित POA, जिसमें डीड में मालिक ही पक्ष बनता है — और नक़ली रूप उसी की नक़ल करता है; फ़र्क़ हमेशा यह है कि रजिस्टर्ड डीड दर्ज मालिक से आ रही है या नहीं।
सूरज लैम्प — GPA बिक्री से हक़ नहीं। 2026 में वही पेशकश = मुक़दमे की पेशकश।
डीड में दाम दबाने का घाटा किसे?
ख़रीदार को: ड्यूटी दाम-या-रेट में ऊँचे पर बनती है, और शक जगाती डीड धारा 47-A में कलेक्टर के पास जा सकती है; आपकी लागत-बुनियाद दबी रक़म जितनी घटती है — बेचते समय वही रक़म टैक्स बनकर लौटती है; और टूटे सौदे में बिन-काग़ज़ नक़द की कोई क़ानूनी हस्ती नहीं। ईमानदार आँकड़े वाली डीड जितनी दिखती है उससे सस्ती पड़ती है।
स्रोत
- अंग्रेज़ी गाइड (मूल) — /guides/land-fraud-red-flags-haryana/ · 17 Jul 2026
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